राष्ट्रीय चिन्हों और स्मारकों को यदि कोई आम नागरिक क्षति पहुंचा दी तो उसे देशद्रोही करार दिया जाएगा लेकिन यही काम रसूखदार नौकरशाह करें तो सौ खून माफ किये जाते हैं । ऐसा ही कुछ बैतूल में घटित हुआ जब राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तम्भ को क्षति पहुंचाने और उसे कचरा वाहन पर ले जाने के प्रयास पर भी कोई दोषी साबित नहीं हुआ ना ही किसी की जिम्मेदारी तय की गई । कंग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष कार्यकर्ताओ समेत मैदान में उतरे और स्तम्भ को टूटने से बचा लिया लेकिन बात तो तब होगी जब कांग्रेस दोषियों को कटघरे तक पहुंचा सके ।
बैतूल में 17 फरवरी के दिन नगरपालिका ने प्रशासन अनुमति लिए बगैर ही कोठी बाजार स्थित राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तम्भ पर बुलडोजर चला दिया । और इस ऐतिहासिक स्मारक को तोड़कर ले जाने के लिए नगरपालिका का कचरा वाहन लाकर खड़ा किया गया । राष्ट्रीय स्मारक के इस अपमान से कांग्रेस और स्थानीय जनता आगबबूला हो गई है और अधिकारियों पर एफआईआर की मांग उठी है । बेतुकी कार्यवाही पर हुए जोरदार विरोध से नगरपालिका के अधिकारी घबरा गए और उन्होंने स्मारक को तोड़ने का काम रोक दिया और अब तो उसकी मरम्मत में जुट गए हैं ।
साल 1930 में महात्मा गांधी भारत यात्रा के दौरान मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में आए थे जहां उन्होंने कोठी बाजार के एक नुक्कड़ पर आम सभा को सम्बोधित किया था । तब से ये स्थान जय स्तम्भ चौक या गांधी चौक के नाम से जाना जाता है । 1930 में ही यहां एक अशोक स्तम्भ स्थापित किया गया था । लेकिन बैतूल नगरपालिका को इतिहास और धरोहरों से कोई सरोकार नहीं है । नगरपालिका ने इस राष्ट्रीय चिन्ह और एक स्मारक पर बुलडोजर चलाने की हिमाकत की और इस स्मारक को तोड़कर ले जाने के लिए कचरा वाहन लाया गया । जैसे ही ये खबर फैली कांग्रेस और स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए । गांधी चौक पर चक्काजाम कर दिया गया और इस धरोहर को तोड़ने के प्रयास विफल हो गए । शहर के प्रबुद्ध लोगों ने इस ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचाने के लिए अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई है । लोगों के मुताबिक नगरपालिका ने जानबूझकर ये करतूत की है ।